प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली किताबो देवी की जिंदगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का सफर
विधवा महिला को मिला पक्का मकान, उज्ज्वला, मनरेगा, जल जीवन मिशन समेत कई योजनाओं का मिला लाभ—अब सुरक्षित भविष्य और आत्मसम्मान के साथ जी रही जिंदगी

प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली किताबो देवी की जिं
दगी, कच्चे घर से पक्के आशियाने तक का सफर
विधवा महिला को मिला पक्का मकान, उज्ज्वला, मनरेगा, जल जीवन मिशन समेत कई योजनाओं का मिला लाभ—अब सुरक्षित भविष्य और आत्मसम्मान के साथ जी रही जिंदगी
फिरोजाबाद, 02 अप्रैल (सू0वि0):
सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसकी जीती-जागती मिसाल विकासखंड एका की ग्राम पंचायत मंचन निवासी किताबो देवी हैं। वर्षों तक कच्चे घर में असुरक्षा और गरीबी का सामना करने वाली किताबो देवी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई।
करीब 7 वर्ष पहले पति स्वर्गीय चंद्रपाल सिंह के निधन के बाद तीन बच्चों—विजेंद्र सिंह, बृजवासी और मनोज कुमार—की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। कच्चे मकान में रहकर हर मौसम की मार झेलना उनकी मजबूरी थी। बरसात में टपकती छत और आंधी-तूफान के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर वह हमेशा चिंतित रहती थीं।
इसी बीच उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की जानकारी मिली और पात्र पाए जाने पर उन्हें इस योजना का लाभ प्राप्त हुआ। पक्का मकान मिलने के बाद उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। अब वह सुरक्षित घर में सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं।
केवल आवास ही नहीं, बल्कि उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला। मनरेगा के तहत मजदूरी, उज्ज्वला योजना से गैस कनेक्शन, शौचालय, राशन कार्ड, बिजली सुविधा और जल जीवन मिशन के तहत घर तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित हुई। इसके साथ ही पति की मृत्यु के बाद उन्हें नियमित विधवा पेंशन भी मिल रही है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
आज किताबो देवी एक पक्के घर की मालकिन होने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं और अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। उनके तीनों बच्चे अब बिना किसी भय के अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।
किताबो देवी कहती हैं, “पहले आंधी-पानी आते ही डर लगने लगता था कि सिर कहां छुपाएंगे, लेकिन अब पक्का घर मिलने से नया जीवन मिला है। मेरे बच्चे अब मन लगाकर पढ़ रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी और जिलाधिकारी रमेश रंजन का दिल से आभार व्यक्त करती हूं।”
यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी योजनाएं सही पात्र तक पहुंचती हैं, तो वे केवल मकान ही नहीं, बल्कि एक परिवार का सुरक्षित भविष्य और समाज में उनका सम्मान भी सुनिश्चित करती हैं।




