उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे कानपुर के उद्यमी, अध्यक्ष सतीश महाना ने कराया लोकतंत्र के मंदिर का भ्रमण
विधानसभा की आधुनिक कार्यप्रणाली, डिजिटल सुविधाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था से रूबरू हुए उद्यमी, औद्योगिक विकास और निवेश पर भी हुई चर्चा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे कानपुर के उद्यमी, अध्यक्ष सतीश महाना ने कराया लोकतंत्र के मंदिर का भ्रमण

विधानसभा की आधुनिक कार्यप्रणाली, डिजिटल सुविधाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था से रूबरू हुए उद्यमी, औद्योगिक विकास और निवेश पर भी हुई चर्चा।

कानपुर। कानपुर के दादानगर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश विधानसभा का भ्रमण कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सदन की आधुनिक कार्यप्रणाली को नजदीक से जाना। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्वयं उद्यमियों को विधानसभा भवन का भ्रमण कराया और सदन की कार्यप्रणाली, विभिन्न समितियों, आधुनिक लाइब्रेरी तथा डिजिटल व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी।

भ्रमण के दौरान उद्यमियों ने विधानसभा की डिजिटल गैलरी, समृद्ध पुस्तकालय, उत्तर प्रदेश विधानसभा के इतिहास पर आधारित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति और 7-डी सिम्युलेटर का अनुभव लिया। इस दौरान उन्हें लोकतंत्र की ऐतिहासिक यात्रा, संवैधानिक मूल्यों और विधानसभा की भूमिका से भी परिचित कराया गया।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा देश की सबसे बड़ी विधानसभाओं में शामिल है, जहां पारदर्शी एवं प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और डिजिटल संसाधनों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
भ्रमण के बाद विधानसभा अध्यक्ष के साथ आयोजित आत्मीय बैठक एवं भोज में प्रदेश के औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार सृजन और उद्यमियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई। उद्यमियों ने विधानसभा की आधुनिक व्यवस्थाओं और अनुशासित कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए इस भ्रमण को प्रेरणादायक बताया।
प्रतिनिधिमंडल में चेयरमैन विजय कपूर, वाइस चेयरमैन सुरेश पुरी, हरीश ईसरानी, विशाल खंडेलवाल, दिनेश कुशवाहा, बसंत लाल विश्वकर्मा, सचिव पंकज गिरधर, राजेश ओमर, अरुण जैन, अवधपाल सिंह, भीमसेन, पम्मी खन्ना, प्रदीप माहेश्वरी, राजेंद्र गुप्ता, श्याम बिजलानी, सुभाष सिंह, सुशील मोहन टकरू, परविंदर सिंह, यशपाल सचान, विकल्प ओमर सहित अनेक उद्यमी शामिल रहे। सभी ने इस अवसर के लिए विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे भ्रमण लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और अधिक मजबूत करते हैं।




