प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों में मरीजों को मिल रहा गुणवत्तापूर्ण उपचार
आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी पद्धतियों के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, लाखों मरीजों को मिला लाभ

प्रदेश के आयुष चिकित्सालयों में मरीजों को मिल रहा गुणवत्तापूर्ण उपचार
आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी पद्धतियों के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, लाखों मरीजों को मिला लाभ
खबर:
प्रदेश में आयुष विभाग के तहत संचालित चिकित्सालयों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष प्रणाली में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्ध जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां शामिल हैं, जो न केवल बीमारियों के उपचार पर बल्कि स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर भी केंद्रित हैं।
आयुर्वेद और योग जैसी पद्धतियां भारत की प्राचीन विरासत का हिस्सा हैं, जिनका उल्लेख वेदों में मिलता है। इन विधाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में आयुष मंत्रालय का गठन किया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में आयुष विभाग का पुनर्गठन किया गया।
प्रदेश में वर्तमान में 2111 आयुर्वेदिक, 254 यूनानी और 1585 से अधिक होम्योपैथिक चिकित्सालय संचालित हैं। कुल मिलाकर 3950 आयुष अस्पतालों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही 19 आयुष महाविद्यालय भी संचालित हैं, जहां चिकित्सा शिक्षा दी जा रही है।
प्रदेश के 16 जनपदों में 50 शैय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सालय संचालित किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में इन चिकित्सालयों के माध्यम से लगभग 6.70 लाख मरीजों को उपचार मिला। वहीं 6798 मरीजों का भर्ती होकर इलाज किया गया। पंचकर्म सुविधा का लाभ 59354 मरीजों ने लिया, 447 माइनर सर्जरी की गईं और 29818 लैब टेस्ट किए गए।
आयुष सेवाओं के विस्तार के तहत बुलंदशहर, उन्नाव और फतेहपुर में नए चिकित्सालयों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि श्रावस्ती, हरदोई, गोरखपुर, संभल, मिर्जापुर और मेरठ में निर्माण कार्य प्रगति पर है।
जनता को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु आयुष्मान भारत योजना के तहत 1034 आयुष आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में 225 योग वेलनेस सेंटर संचालित हैं, जहां नियमित योग प्रशिक्षण दिया जाता है। इन केंद्रों के माध्यम से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और तनाव जैसी बीमारियों का उपचार योग और प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा रहा है।
आयुष शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जो प्रदेश के आयुष महाविद्यालयों को संबद्ध कर उनके संचालन को सुचारू बना रहा है।
इसके अतिरिक्त अयोध्या, बरेली और वाराणसी में नए आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ स्थित आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी कॉलेजों में 3डी एनाटोमेज टेबल स्थापित करने की योजना है। साथ ही 17 महाविद्यालयों के 51 कक्षाओं को स्मार्ट क्लास में विकसित किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा पद्धतियों को सुदृढ़ करने और जनता को सस्ती व प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।




