आदिवासियों के अधिकारों पर भाजपा पर साधा निशाना, कहा- ‘जल, जंगल, जमीन’ पर उनका जन्मसिद्ध अधिकार

आदिवासियों के अधिकारों पर भाजपा पर साधा निशाना, कहा- ‘जल, जंगल, जमीन’ पर उनका जन्मसिद्ध अधिकार
नई दिल्ली। आदिवासी समाज के अधिकारों और पहचान को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा गया है कि आदिवासी समुदाय देश की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। वक्तव्य में कहा गया कि आदिवासी समाज को पहला वैज्ञानिक, पहला वैद्य और पहला इंजीनियर माना जाता है, इसलिए उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बयान में कहा गया कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, आदिवासी) में ‘ए’ का अर्थ आदिवासी है और भाजपा आदिवासियों को उनकी वास्तविक पहचान से वंचित करने का प्रयास कर रही है। आरोप लगाया गया कि भाजपा आदिवासी शब्द के स्थान पर ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग करती है, जिसके पीछे आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर उनके पारंपरिक एवं जन्मजात अधिकारों को कमजोर करने की मंशा छिपी हुई है।
वक्तव्य में कहा गया कि आदिवासी समाज सदियों से जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है। ऐसे में उन्हें ‘वनवासी’ कहकर यह दर्शाने की कोशिश की जाती है कि वे बाद में जंगलों में जाकर बसे हैं, जिससे उनके मूल अधिकारों को चुनौती दी जा सके।
इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन आदिवासी समाज की परंपराओं, भाषा, संस्कृति और जीवनशैली पर अपने विचार थोपने का प्रयास कर रहे हैं। बयान में कहा गया कि संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त जनजातीय अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है तथा आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर उनके अधिकारों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।




