फिरोजाबाद के चूड़ी कारखानों में मजदूरों का बवाल, कई फैक्ट्रियों में काम ठप
मजदूरी बढ़ाने और कार्य अवधि घटाने की मांग को लेकर पोट भट्ठी मजदूरों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

फिरोजाबाद के चूड़ी कारखानों में मजदूरों का बवाल, कई फैक्ट्रियों में काम ठप
मजदूरी बढ़ाने और कार्य अवधि घटाने की मांग को लेकर पोट भट्ठी मजदूरों का प्रदर्शन, पुलिस ने संभाला मोर्चा

फिरोजाबाद। सुहाग नगरी फिरोजाबाद के चूड़ी उद्योग में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब पोट भट्ठी मजदूरों ने मजदूरी और कार्य अवधि को लेकर कई कारखानों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मजदूरों के हंगामे के चलते शहर की कई चूड़ी फैक्ट्रियों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
मजदूरों का आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार उन्हें प्रतिदिन 750 रुपये मजदूरी मिलनी चाहिए, लेकिन फैक्ट्री संचालक केवल 500 रुपये ही दे रहे हैं। इसके अलावा आठ घंटे की जगह दस घंटे तक काम कराया जा रहा है, जिससे मजदूरों में भारी नाराजगी है।
अमृत ग्लास समेत कई फैक्ट्रियों में रुका उत्पादन
विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन का असर अमृत ग्लास, आरएस ग्लास, भूरे खां ग्लास समेत आधा दर्जन से अधिक चूड़ी कारखानों में देखने को मिला, जहां उत्पादन प्रभावित हो गया।
मौके पर पहुंची पुलिस, शुरू हुई वार्ता
स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही सीओ सिटी प्रवीन तिवारी कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने मजदूरों और फैक्ट्री संचालकों से बातचीत कर माहौल शांत कराने का प्रयास किया। फिलहाल पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
महंगाई में परिवार चलाना मुश्किल — मजदूर
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई में 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि लंबे समय से मजदूरी बढ़ाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
उद्योग संकट का हवाला दे रहे संचालक
दूसरी ओर फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि चूड़ी उद्योग पहले से आर्थिक संकट और बढ़ती लागत की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में मजदूरी बढ़ाना फिलहाल आसान नहीं है।
उत्पादन प्रभावित, उद्योग पर असर
अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से चूड़ी उद्योग का उत्पादन प्रभावित हुआ है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका असर व्यापार और सप्लाई पर भी पड़ सकता है।




