फिरोजाबाद में पकाई चूड़ी श्रमिकों का 5 साल पुराना वेतन विवाद खत्म, 15% वेतन वृद्धि पर बनी सहमति
डीएम संतोष कुमार शर्मा के निर्देशन में 4 घंटे चली मैराथन वार्ता सफल, श्रमिकों को मिलेगा बढ़ा वेतन, रेस्ट रूम, पहचान पत्र, पेंशन और बीमा योजनाओं का लाभ

फिरोजाबाद में पकाई चूड़ी श्रमिकों का 5 साल पुराना वेतन विवाद खत्म, 15% वेतन वृद्धि पर बनी सहमति

डीएम संतोष कुमार शर्मा के निर्देशन में 4 घंटे चली मैराथन वार्ता सफल, श्रमिकों को मिलेगा बढ़ा वेतन, रेस्ट रूम, पहचान पत्र, पेंशन और बीमा योजनाओं का लाभ
फिरोजाबाद। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के निर्देशन में जिला प्रशासन और श्रम विभाग के प्रयासों से पकाई चूड़ी श्रमिकों तथा कारखाना स्वामियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा वेतन विवाद सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाप्त हो गया। श्रम कार्यालय में दोनों पक्षों के बीच करीब चार घंटे तक चली मैराथन वार्ता के बाद महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिससे जिले के करीब एक हजार पकाई चूड़ी श्रमिकों को बड़ी राहत मिली है।

समझौते के अनुसार पकाई चूड़ी श्रमिकों के वेतन में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाएगी। इसके साथ ही सभी कारखानों में श्रमिकों के लिए रेस्ट रूम (विश्राम कक्ष) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। श्रमिकों को पेंशन और बीमा योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा सभी पकाई श्रमिकों को कारखाना स्वामियों की ओर से पहचान पत्र भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
बताया गया कि जिले में हील वाली और सोने की परत वाली पारंपरिक चूड़ियां बनाने वाली लगभग 36 पकाई भट्टियां संचालित हैं, जिनमें करीब 1,000 श्रमिक कार्यरत हैं। पिछले पांच वर्षों से वेतन में बढ़ोतरी नहीं होने के कारण लगभग 300 श्रमिक वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे।
इस मुद्दे पर पूर्व में 2 जून और 17 जून को भी दोनों पक्षों के बीच वार्ता आयोजित की गई थी, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। आज हुई बैठक में सभी बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया।
बैठक में भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष रमाकांत के नेतृत्व में श्रमिक प्रतिनिधि सुरेश, छत्रपाल और सुल्तान सिंह मौजूद रहे। वहीं कारखाना स्वामी पक्ष से अरविंद, बनवारी लाल, फिरोज खान और मोहम्मद मुअज्जम (इंडिया ग्लास आदि के संचालक) ने भाग लिया।
जिला प्रशासन ने इस समझौते को श्रमिक हितों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इससे न केवल श्रमिकों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि उद्योग में सौहार्दपूर्ण वातावरण भी मजबूत होगा।




