ओम हॉस्पिटल में नवजात को लेकर बवाल: ‘बच्चा बदलने’ के आरोप से मचा हड़कंप, अस्पताल बोला—चिट की गलती से हुई गलतफहमी
परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल, नवजात के कपड़ों पर मिली चांदनी के नाम की चिट ने बढ़ाया शक; अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को नकारा, डीएनए जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद

ओम हॉस्पिटल में नवजात को लेकर बवाल: ‘बच्चा बदलने’ के आरोप से मचा हड़कंप, अस्पताल बोला—चिट की गलती से हुई गलतफहमी

परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल, नवजात के कपड़ों पर मिली चांदनी के नाम की चिट ने बढ़ाया शक; अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को नकारा, डीएनए जांच से सच्चाई सामने आने की उम्मीद
फिरोजाबाद। शहर के एमजी रोड स्थित ओम हॉस्पिटल में प्रसव के बाद नवजात को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने अस्पताल की व्यवस्था और नवजातों की पहचान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार ने बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए अस्पताल स्टाफ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मामला सामने आने के बाद परिजनों में बेचैनी का माहौल है।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब ललित गुप्ता को उनकी पत्नी पूनम के प्रसव के बाद नवजात सौंपा गया। परिजनों के मुताबिक नवजात के कपड़ों पर ‘चांदनी’ नाम की चिट लगी हुई थी। इसी चिट को देखकर परिवार को शक हुआ कि कहीं नवजात की अदला-बदली तो नहीं हो गई।
एक घंटे के अंतर में हुईं दो डिलीवरी, यहीं से उलझी कहानी

ओम हॉस्पिटल प्रशासन के अनुसार चांदनी की डिलीवरी करीब 3:09 बजे हुई थी और उसके यहां बेटा पैदा हुआ था। अस्पताल का कहना है कि नवजात कमजोर था और उसे सांस लेने में परेशानी थी, जिसके चलते उसे तत्काल NICU में भर्ती कराया गया।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक इसी दौरान नवजात की पहचान के लिए तैयार की गई चिट वहीं लगी रह गई।
इसके बाद करीब 4:46 बजे पूनम पत्नी ललित गुप्ता की डिलीवरी हुई, जिसमें बेटी का जन्म हुआ। अस्पताल का कहना है कि रिकॉर्ड में पूनम के यहां बेटी का जन्म दर्ज किया गया था, लेकिन स्टाफ की गलती से चांदनी के नाम वाली चिट पूनम के नवजात के कपड़ों पर लगा दी गई।
अस्पताल प्रशासन इसी गलती को पूरे विवाद की वजह बता रहा है।
‘बच्चे के कपड़ों पर चांदनी का नाम देखकर मैं हैरान हो गया’—ललित

ललित गुप्ता का कहना है कि जब उन्हें नवजात सौंपा गया तो उसके कपड़ों पर चांदनी नाम की चिट लगी थी। उन्होंने अस्पताल स्टाफ से चांदनी के बारे में जानकारी ली तो उन्हें बताया गया कि चांदनी के यहां लड़की हुई है और बच्चा गंभीर होने के कारण NICU में रखा गया है।
ललित के मुताबिक जब उन्होंने चांदनी के परिवार से बात की तो वहां से उन्हें बताया गया कि चांदनी के यहां बेटा हुआ है।
यही बात उनके लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई।
ललित का कहना है कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ, लेकिन अस्पताल की डॉक्टर ने उनसे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर डीएनए जांच कराई जाएगी। ललित का कहना है कि वह डॉक्टर की इस बात से संतुष्ट हैं और जांच के बाद सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

ललित के भाई विकास ने उठाए अस्पताल स्टाफ की जानकारी पर सवाल
वहीं ललित के भाई विकास गुप्ता ने अस्पताल स्टाफ की ओर से दी गई जानकारी पर सवाल खड़े किए हैं।
विकास का कहना है कि जब उन्होंने अस्पताल में जाकर चांदनी के बारे में पूछा तो स्टाफ ने उन्हें बताया कि चांदनी के यहां लड़की हुई है, जबकि चांदनी के परिवार वालों ने बेटा होने की बात कही।
विकास का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ की अलग-अलग जानकारी से परिवार का शक और गहरा गया।

ललित की मां ने भी जताई बच्चे की अदला-बदली की आशंका
परिवार की बुजुर्ग महिला यानी ललित गुप्ता की मां ने भी आशंका जताई है कि उनके नवजात को बदला गया है। परिवार की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आवश्यकता हो तो डीएनए जांच के जरिए नवजात की पहचान स्पष्ट की जाए।

अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को बताया गलत
वहीं दूसरी ओर ओम हॉस्पिटल प्रशासन ने बच्चा बदलने के आरोप को पूरी तरह गलत बताया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दोनों प्रसव अलग-अलग समय पर हुए थे और नवजातों के रिकॉर्ड अस्पताल में दर्ज हैं।
अस्पताल के मुताबिक पूरा विवाद नाम की चिट गलत नवजात के कपड़ों पर लग जाने से पैदा हुआ। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि चांदनी के बेटे को सांस लेने में दिक्कत होने के कारण NICU में भर्ती कराया गया था, जबकि बाद में पूनम के यहां बेटी का जन्म हुआ।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह मामला बच्चा बदलने का नहीं, बल्कि स्टाफ की पहचान-पर्ची संबंधी गलती का है।

अब जांच से साफ होगी तस्वीर
इस पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। परिवार नवजात के कपड़ों पर दूसरी महिला के नाम की चिट और स्टाफ से मिली कथित अलग-अलग जानकारी को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि अस्पताल इसे महज चिट की गलती बता रहा है।
ऐसे में सबसे अहम होगा कि अस्पताल के डिलीवरी रिकॉर्ड, नवजात की पहचान संबंधी रिकॉर्ड, NICU रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाए। जरूरत पड़ने पर डीएनए जांच इस पूरे विवाद पर अंतिम रूप से स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

सवाल बड़ा है—सिर्फ चिट की गलती या अस्पताल की गंभीर लापरवाही?
मामले ने अस्पतालों में नवजातों की पहचान और उन्हें परिजनों को सौंपने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अस्पताल प्रशासन का दावा सही है तो भी सवाल यह है कि एक नवजात के नाम की पहचान-पर्ची दूसरे नवजात के कपड़ों पर कैसे पहुंची?
और यदि परिजनों के आरोपों में सच्चाई है तो मामला और भी गंभीर हो सकता है।
फिलहाल बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। डीएनए जांच और रिकॉर्ड की निष्पक्ष पड़ताल ही बताएगी कि मामला महज स्टाफ की लापरवाही था या इसके पीछे कोई और वजह।
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