गुरु पूर्णिमा 2026: एकरसानंद आश्रम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन
सुबह चार बजे से लगी श्रद्धालुओं की कतारें, स्वामी हरिहरानंद महाराज ने भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा का बताया महत्व
गुरु पूर्णिमा 2026: एकरसानंद आश्रम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन

सुबह चार बजे से लगी श्रद्धालुओं की कतारें, स्वामी हरिहरानंद महाराज ने भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा का बताया महत्व

मैनपुरी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जनपद मैनपुरी स्थित एकरसानंद आश्रम में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का आश्रम पहुंचना शुरू हो गया और पूरे दिन गुरु पूजन, भजन-कीर्तन तथा धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ स्वामी हरिहरानंद महाराज का पूजन-अर्चन किया, जो दोपहर एक बजे तक जारी रहा। इसके बाद परम पूज्य महाराज एकरसानंद जी का भी भक्तिभाव से पूजन कराया गया।

पूरे आश्रम परिसर में भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहा। श्रद्धालु पूजा की थालियां, फूल-मालाएं और प्रसाद लेकर अपने गुरुदेव के दर्शन और आशीर्वाद के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए। आश्रम के विभिन्न स्थलों पर गुरु पूजन, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर स्वामी हरिहरानंद महाराज ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु और शिष्य का संबंध अत्यंत पवित्र एवं प्रेरणादायी माना गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी महान परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि जिस समाज और राष्ट्र में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों का सम्मान नहीं होता, वहां स्थायी उन्नति संभव नहीं होती। ऐसे समाज में सदैव संघर्ष और असंतुलन की स्थिति बनी रहती है।
स्वामी जी ने युवाओं से भारतीय संस्कृति, संस्कार और सनातन मूल्यों को आत्मसात कर उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा और उसका प्रचार-प्रसार ही समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला है।
रिपोर्ट: मोहित गुप्ता, पत्रकार
स्थान: मैनपुरी



