लोहिया अस्पताल में युवक का हाथ काटे जाने का मामला: परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप, CM और स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
फिरोजाबाद के 21 वर्षीय अंकित राठौर ने सरकार से मुआवजा और नौकरी की मांग की, अखिलेश यादव ने आर्थिक मदद के साथ उठाई सख्त कार्रवाई की मांग

लोहिया अस्पताल में युवक का हाथ काटे जाने का मामला: परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप, CM और स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
फिरोजाबाद के 21 वर्षीय अंकित राठौर ने सरकार से मुआवजा और नौकरी की मांग की, अखिलेश यादव ने आर्थिक मदद के साथ उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
Pink City Times | PCT News

लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान फिरोजाबाद निवासी 21 वर्षीय युवक का बायां हाथ काटे जाने का मामला लगातार चर्चा में है। युवक के परिजनों ने अस्पताल में उपचार के दौरान गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि हाथ में ड्रिप के लिए लगाए गए विगो के बाद संक्रमण फैलता गया और समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण संक्रमण इतना बढ़ गया कि अंकित का हाथ कोहनी के पास से काटना पड़ा।
फिरोजाबाद के करबला गली नंबर-1 निवासी अंकित राठौर को भोजन नली में खाना फंसने और पेट दर्द की शिकायत थी। परिजन उसे 2 जून को लखनऊ लेकर पहुंचे थे। 8 जून को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उसकी सर्जरी हुई।

परिजनों के अनुसार, सर्जरी के बाद हाथ में ड्रिप लगाने के लिए विगो लगाया गया। इसके बाद हाथ में दर्द और सूजन शुरू हो गई। परिजनों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद शुरुआती दौर में समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। अगले दिन हाथ का रंग काला पड़ने लगा और संक्रमण तेजी से फैल गया।

परिजनों का दावा है कि बाद में चिकित्सकों ने बताया कि यदि शुरुआती कुछ घंटों में उचित उपचार मिल जाता तो हाथ को बचाया जा सकता था। संक्रमण बढ़ने के बाद अंकित के बाएं हाथ को कोहनी के पास से काटना पड़ा। परिजनों का कहना है कि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए ऑपरेशन की प्रक्रिया दो बार करनी पड़ी।
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भी लगाई थी गुहार

परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने न्याय और कार्रवाई की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से भी मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की थी। परिजनों के मुताबिक, उन्हें मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उनका आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

इसके बाद परिवार ने अपनी आवाज को आगे पहुंचाने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की।

अखिलेश यादव ने न केवल परिवार की बात सुनी, बल्कि अंकित की आर्थिक मदद भी की और मामले को लेकर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकारी अस्पताल में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि हाथ गंवा चुके युवक के जीवनयापन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि जिस प्रकार उन्होंने अंकित की आर्थिक सहायता की है, उसी प्रकार सरकार को भी आगे आकर युवक की मदद करनी चाहिए।
अब सरकार से मुआवजा और नौकरी की मांग

अंकित राठौर अब अपने घर फिरोजाबाद लौट आया है। हाथ गंवाने के बाद उसके सामने रोजगार और भविष्य को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अंकित का कहना है कि वह सरकार से उचित मुआवजा और एक नौकरी चाहता है, ताकि वह अपना जीवन सम्मान के साथ चला सके।
अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के स्तर तक शिकायत पहुंचने और कार्रवाई के आश्वासन के बाद भी यदि परिवार के आरोप सही हैं, तो मामले में जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई? क्या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? और सबसे बड़ा सवाल—अपना हाथ गंवा चुके इस युवा के भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
मामले में अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।




