घर की चौखट से शहद कारोबार तक: फिरोजाबाद की रिंकी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया शहद उत्पादन, आज 220 से अधिक बॉक्स के साथ हर माह लगभग 1.20 लाख रुपये की आय; कई महिलाओं को भी दिया रोजगार
घर की चौखट से शहद कारोबार तक: फिरोजाबाद की रिंकी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया शहद उत्पादन, आज 220 से अधिक बॉक्स के साथ हर माह लगभग 1.20 लाख रुपये की आय; कई महिलाओं को भी दिया रोजगार
फिरोजाबाद।
किसी भी समाज की प्रगति उसकी महिलाओं के सशक्तिकरण पर निर्भर करती है। उत्तर प्रदेश सरकार की महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर जनपद फिरोजाबाद के विकासखंड मदनपुर के ग्राम लखई (ग्राम पंचायत बाछेमई) निवासी रिंकी ने अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। आज उनकी सफलता क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
रिंकी पहले घर की चारदीवारी तक सीमित थीं और आर्थिक स्थिति भी सामान्य थी। उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित ‘राधा रानी स्वयं सहायता समूह’ की सदस्यता ग्रहण की।
समूह से जुड़ने के बाद उपायुक्त स्वतः रोजगार तुलिका श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में रिंकी ने आरसेटी के माध्यम से शहद उत्पादन का तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बैंक और स्वयं सहायता समूह के सहयोग से उन्हें 1.20 लाख रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने 50 शहद उत्पादन बॉक्स के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया।
पहले ही वर्ष कमाया दो लाख रुपये का मुनाफा
रिंकी ने कड़ी मेहनत और लगन से पहले ही वर्ष लगभग 2 लाख रुपये का मुनाफा अर्जित किया और समय पर पूरा ऋण भी चुका दिया। उनकी सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत उन्हें व्यवसाय विस्तार के लिए 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।
इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आज उनके पास 220 से अधिक शहद उत्पादन बॉक्स हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर शुद्ध शहद का उत्पादन किया जा रहा है।
हर महीने लगभग 1.20 लाख रुपये की आय
वर्तमान में रिंकी शहद उत्पादन के व्यवसाय से हर महीने लगभग 1.20 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उनकी दो बेटियां और एक बेटा अच्छे विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
कई महिलाओं को भी दिया रोजगार
रिंकी ने अपने व्यवसाय के माध्यम से गांव की 5 से 6 महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है। ये महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार कार्य कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
रिंकी बोलीं— समूह ने बदल दी जिंदगी
रिंकी का कहना है कि पहले वह घर से बाहर नहीं निकल पाती थीं, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और शहद उत्पादन का व्यवसाय शुरू करने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया। आज पूरा परिवार उनके इस कार्य में सहयोग करता है और समाज में उन्हें सम्मान मिला है।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम को दिया। रिंकी ने क्षेत्र की अन्य महिलाओं से भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर प्रशिक्षण लेने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
— रिपोर्ट: जिला सूचना कार्यालय, फिरोजाबाद




