फिरोजाबाद में आलू किसानों को उचित मूल्य दिलाने की कवायद तेज, डीएम ने आलू आधारित उद्योग स्थापित करने के दिए निर्देश
कोल्ड स्टोरेज स्वामियों, किसानों और अधिकारियों के साथ बैठक; खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों पर 35% तक अनुदान और मूल्य संवर्धन पर जोर

फिरोजाबाद में आलू किसानों को उचित मूल्य दिलाने की कवायद तेज, डीएम ने आलू आधारित उद्योग स्थापित करने के दिए निर्देश
कोल्ड स्टोरेज स्वामियों, किसानों और अधिकारियों के साथ बैठक; खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों पर 35% तक अनुदान और मूल्य संवर्धन पर जोर
फिरोजाबाद। जिले में आलू उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और आलू आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आलू किसान, शीतगृह स्वामी, आलू व्यापारी, एफपीओ प्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में जिला उद्यान अधिकारी सी.पी. अवस्थी ने बताया कि जनपद में इस वर्ष करीब 56,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की गई, जिससे लगभग 19.21 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहा, लेकिन बाजार में आलू के कम दाम मिलने के कारण भंडारित आलू की निकासी धीमी बनी हुई है।
किसानों ने बैठक में आलू के गिरते दामों पर चिंता जताते हुए राहत की मांग की। तत्काल राहत के रूप में किसानों ने आलू पर मंडी शुल्क (मंडी टैक्स) माफ करने तथा अन्य जनपदों और राज्यों में आलू भेजने पर परिवहन अनुदान उपलब्ध कराने की मांग रखी।
बैठक में आलू के मूल्य संवर्धन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि आलू से चिप्स, फ्लेक्स, फ्रेंच फ्राइज, स्टार्च, पाउडर और बायोडिग्रेडेबल पॉलिथीन जैसे कई उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।
जिला उद्यान अधिकारी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अथवा अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक कोर कमेटी गठित की जाए, जो जिले में आलू आधारित उद्योगों की संभावनाओं का अध्ययन कर मॉडल परियोजना तैयार करेगी। समिति उद्यमियों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग भी उपलब्ध कराएगी, जिससे जिले में शीघ्र नई प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हो सकें और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
बैठक के अंत में शीतगृहों में आलू भंडारित करने वाले किसानों और व्यापारियों को सलाह दी गई कि वे आलू की निकासी चरणबद्ध तरीके से करते रहें, ताकि भंडारण सत्र के अंतिम समय में कीमतों में संभावित गिरावट से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।




