भारत-अमेरिका कृषि समझौते पर उठे सवाल, भारतीय किसान यूनियन (किरन) ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
किसानों के हितों की सुरक्षा, विदेशी कृषि उत्पादों पर नियंत्रण और समझौते की पारदर्शिता की उठाई मांग

भारत-अमेरिका कृषि समझौते पर उठे सवाल, भारतीय किसान यूनियन (किरन) ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
किसानों के हितों की सुरक्षा, विदेशी कृषि उत्पादों पर नियंत्रण और समझौते की पारदर्शिता की उठाई मांग
फिरोजाबाद/शिकोहाबाद। भारत-अमेरिका कृषि समझौते के संभावित प्रभावों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (किरन) ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया है। संगठन का कहना है कि यदि कृषि क्षेत्र में विदेशी कंपनियों और आयातित कृषि उत्पादों को अत्यधिक बढ़ावा दिया गया तो इसका प्रतिकूल प्रभाव देश के किसानों, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारतीय किसान यूनियन (किरन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विवेक यादव ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां करोड़ों लोगों की आजीविका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। ऐसे में कृषि क्षेत्र से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय को लेने से पहले किसानों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि किसान केवल अन्न उत्पादन करने वाला वर्ग नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था की मजबूत नींव है। कोरोना महामारी जैसे संकट के समय भी किसानों ने लगातार उत्पादन जारी रखकर देश की खाद्य आपूर्ति और आर्थिक व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
संगठन ने कहा कि कृषि केवल व्यापारिक विषय नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा, करोड़ों परिवारों की आजीविका और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा मुद्दा है। यदि कृषि क्षेत्र को प्रभावित करने वाले निर्णय बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के लिए जाते हैं, तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
संगठन की प्रमुख मांगें
भारतीय किसान यूनियन (किरन) ने राष्ट्रपति से मांग की है कि—
किसी भी कृषि समझौते से पूर्व किसान संगठनों एवं कृषि विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं।
भारत-अमेरिका कृषि एवं व्यापार समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
विदेशी कृषि उत्पादों को ऐसी कोई विशेष रियायत न दी जाए जिससे भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचे।
किसानों और आम जनता के हितों के विरुद्ध किसी भी समझौते को तत्काल निरस्त किया जाए।
ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। संगठन ने विश्वास जताया है कि केंद्र सरकार देश के अन्नदाताओं के हितों की रक्षा के लिए उचित और सकारात्मक कदम उठाएगी।




