पर्चे की औपचारिकता में उलझा इलाज, स्ट्रेचर पर मरीज की मौत
मेडिकल कॉलेज के 200 शैया अस्पताल में गंभीर मरीज को पहले ओपीडी पर्चा बनवाने की बात कहने का आरोप, सीएमएस ने माना मामला गंभीर और निंदनीय

PCT News | फिरोजाबाद
पर्चे की औपचारिकता में उलझा इलाज, स्ट्रेचर पर मरीज की मौत

मेडिकल कॉलेज के 200 शैया अस्पताल में गंभीर मरीज को पहले ओपीडी पर्चा बनवाने की बात कहने का आरोप, सीएमएस ने माना मामला गंभीर और निंदनीय
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज के 200 शैया अस्पताल में इलाज में कथित लापरवाही के चलते 55 वर्षीय मरीज की मौत का मामला सामने आया है। नारखी क्षेत्र के आतीपुर निवासी महावीर सिंह की तबीयत गंभीर बताई गई थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज के बजाय उनसे संबंधित विभाग का नया ओपीडी पर्चा बनवाने के लिए कहा गया।
परिजनों के मुताबिक, महावीर सिंह को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उनके पास इमरजेंसी का पर्चा था और उन्हें ट्रॉमा सेंटर से क्षय रोग विभाग (टीबी वार्ड) ले जाया गया। आरोप है कि वहां स्टाफ ने पहले संबंधित विभाग का ओपीडी पर्चा बनवाकर लाने की बात कही। मरीज स्ट्रेचर पर ही गंभीर हालत में पड़ा रहा और उसका बेटा पर्चा बनवाने चला गया। इसी दौरान मरीज की मौत हो गई।
मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा
शव को स्ट्रेचर पर रखकर जताया आक्रोश, पुलिस ने समझाकर कराया मामला शांत
मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में शव को स्ट्रेचर पर रखकर हंगामा किया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया।
सीएमएस बोले- गंभीर मरीज को पर्चे के लिए नहीं रोका जाना चाहिए

डॉक्टर नवीन जैन ने कहा- इमरजेंसी पर्चा भी अस्पताल का पर्चा, इलाज पहले और औपचारिकता बाद में हो सकती है
मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नवीन जैन ने घटना को गंभीर और निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार यह घटना कल सुबह की है। मरीज एक रुपये का पर्चा बनवाकर ट्रॉमा सेंटर से क्षय रोग विभाग में गया था, जहां उसे पहले संबंधित विभाग का ओपीडी पर्चा बनवाने के लिए कहा गया।
सीएमएस ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी मरीज की हालत गंभीर है तो उसे केवल पर्चे की औपचारिकता के कारण उपचार से नहीं रोका जाना चाहिए। मरीज के पास इमरजेंसी का पर्चा है तो वह भी अस्पताल का ही पर्चा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में स्टाफ और डॉक्टर को तत्काल उपचार शुरू करना चाहिए, जबकि आवश्यक पर्चा बाद में भी बनवाया जा सकता है।
स्टाफ की भूमिका पर भी उठे सवाल
सीएमएस ने कहा- जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर होगी कार्रवाई
डॉ. नवीन जैन ने बताया कि मामले में संबंधित स्टाफ की भूमिका की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी या डॉक्टर की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएस ने यह भी कहा कि संबंधित विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि उनके अधीन काम करने वाले डॉक्टर और स्टाफ मरीजों को उचित उपचार उपलब्ध करा रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल के किसी भी विभाग में मरीज को इलाज मिलने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।
डॉ. जैन ने यह भी बताया कि संबंधित स्टाफ को लेकर पूर्व में एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा अभद्र व्यवहार की शिकायत भी उनके संज्ञान में आई थी। हालांकि, इस शिकायत और वर्तमान घटना के बीच किसी संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
डीएम ने दिए जांच के संकेत

मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी मामले की जानकारी जुटाकर कार्रवाई की बात कह चुका है
मामले को लेकर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी पूरे मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
फिलहाल मरीज की मौत के वास्तविक कारण और इलाज में लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रशासनिक जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि गंभीर हालत में मरीज को समय पर उपचार मिला या नहीं और पर्चे की औपचारिकता के कारण उपचार में किसी तरह की देरी हुई थी या नहीं।
PCT News




