फिरोजाबाद नगर निगम में ठेका सफाई कर्मचारियों का धरना, महापौर कामिनी राठौर भी बैठीं साथ
वेतन भुगतान समेत कई मांगों को लेकर कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, खाते में वेतन आने तक धरने पर साथ रहने का महापौर ने दिया आश्वासन

फिरोजाबाद नगर निगम में ठेका सफाई कर्मचारियों का धरना, महापौर कामिनी राठौर भी बैठीं साथ
वेतन भुगतान समेत कई मांगों को लेकर कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, खाते में वेतन आने तक धरने पर साथ रहने का महापौर ने दिया आश्वासन
फिरोजाबाद। नगर निगम में कार्यरत ठेका सफाई कर्मचारियों, सीवर हेल्परों और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कर्मियों ने वेतन भुगतान समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को नगर निगम परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश ठेका सफाई कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और जल्द समाधान की मांग की।
धरने के दौरान नगर निगम की महापौर कामिनी राठौर भी कर्मचारियों के बीच पहुंचीं और उनके साथ धरने पर बैठ गईं। महापौर ने कहा कि कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन पहुंचने तक वह भी उनके साथ धरने पर बैठी रहेंगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाकर वेतन भुगतान से जुड़ी फाइल मंगाने के निर्देश दिए।

वेतन में कटौती न करने की मांग
कर्मचारियों ने अकुशल श्रमिकों को 15,007 रुपये तथा कुशल कर्मियों को 18,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिए जाने की मांग रखी। इसके साथ ही वेतन से किसी भी प्रकार की अनुचित कटौती नहीं किए जाने की मांग भी उठाई गई।
कर्मचारियों ने ठेका कंपनी साईनाथ पर अनुबंध से जुड़ी कथित अनुचित शर्तों का आरोप लगाते हुए संबंधित समझौते को निरस्त करने की मांग की।

कर्मचारी की मृत्यु पर आर्थिक सहायता की मांग
संघ की ओर से ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने की मांग रखी गई। वहीं प्राकृतिक मृत्यु की स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए 25 हजार रुपये की सहायता देने की मांग भी उठाई गई।
इसके अलावा ठेका कर्मचारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण में कर्मचारी संघ की सहमति लेने तथा ठेका व्यवस्था से जुड़ी कथित अनियमितताओं और दस्तावेजों में गड़बड़ी की एसआईटी जांच कराने की मांग भी कर्मचारियों ने उठाई।
एक महीने बाद दोबारा धरने पर बैठे कर्मचारी
महापौर ने बताया कि इससे पहले एक सितंबर को भी कर्मचारी वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे थे। उस समय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से मांगों के समाधान का आश्वासन दिया गया था। कर्मचारियों के मुताबिक, इसके बावजूद एक महीने बाद भी वेतन का भुगतान नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें दोबारा धरना देना पड़ा।

महापौर ने कर्मचारियों को आश्वासन देते हुए कहा कि वेतन उनके खातों में पहुंचने तक वह उनके साथ धरने पर मौजूद रहेंगी। वहीं कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
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